Gori Shankar Bhajan

मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी बोल ज़रा ॥
बोल, ज़रा ओ नंदी, बोल ज़रा ॥
मैं तो ढूँढूँ, दिन और रात, नंदी बोल ज़रा ॥
मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी...

पर्वत, नदियों में, जाकर ढूँढा ॥
सागर, से भी, मैंने पूछा ॥
वो तो गंगा, ले गए साथ, नंदी बोल ज़रा ॥
मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी...

नाग, लोक में, जाकर ढूँढा ॥
सर्पों, से भी, मैंने पूछा ॥
वो तो नाग़, ले गए साथ, नंदी बोल ज़रा ॥
मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी...

नील, गगन में, जाकर ढूँढा ॥
तारों, से भी, मैंने पूछा ॥
वो तो चंदा, ले गए साथ, नंदी बोल ज़रा ॥
मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी...

बागों, में भी, जाकर ढूँढा ॥
फ़ूल और, कलियों से भी, मैंने पूछा ॥
वो तो भंगिया, ले गए साथ, नंदी बोल ज़रा ॥
वो तो भंगिया ले गये साथ, नंदी बोल जरा,

कीर्तन, में भी, जाकर ढूँढा ॥
भक्तों, से भी, मैंने पूछा ॥
वो तो डमरू, ले गए साथ, नंदी बोल ज़रा ॥
मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी...

डमरू दी... डमरू दी तान निराली
डमरू दी... डमरू दी तान निराली, नाथ तेरे, डमरू दी ॥

जदों मौज विच डमरू बजावे,
तिन्न त्रिलोकी झूमण लावे ॥
ओ गौरां है मतवाली, नाथ तेरे, डमरू दी ॥
डमरू दी... डमरू दी तान निराली, नाथ तेरे, डमरू दी ॥

कुल दुनियां विच तेरा साया,
कण-कण विच मेरा नाथ समाया ॥
ओ तूँ तीन लोक दा बाली, नाथ तेरे, डमरू दी ॥
डमरू दी... डमरू दी तान निराली, नाथ तेरे, डमरू दी ॥

विच कैलाश दे लाया डेरा,
अंग-संग रहिंदा नंदी तेरा ॥
तैनूं कहिंदे बाबा बर्फानी, नाथ तेरे, डमरू दी ॥
डमरू दी... डमरू दी तान निराली, नाथ तेरे, डमरू दी ॥

काशी, से आई है बारात, गौरा जी के, अंगना में ॥
ओ गौरा जी के, अंगना में, ओ गौरा जी के, अंगना में ॥ दूल्हा, बने हैं भोलेनाथ, गौरा जी के, अंगना में ।
काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

विष्णु, जी आए, शिव को, सजाए ।
मुंडों, की माला, गले पहनाए ॥
माथे पे, सजाए चाँद, गौरा जी के, अंगना में...
काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

ब्रह्मा, जी आए, मंडप सजाए ।
शिव, गौरा की, शादी कराए ॥
लगन लिखा रहे आज, गौरा जी के, अंगना में...
काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

अवध, पुरी से, राम जी आए ।
गौरा, माँ की, डोली सजाए ॥
सीता जी, करे श्रृंगार, गौरा जी के, अंगना में...
काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

गोकुल, नगरी से, कान्हा जी आए ।
कान्हा, जी आए, मुरली बजाए ॥
राधा जी, गाए मंगल गान, गौरा जी के अंगना में...
काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

सूरज, चंदा, बन ठन आए ।
बनके, बाराती, धूम मचाए ॥
झूम, रहा आकाश, गौरा जी के, अंगना में...
काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

सृष्टि, का, कण कण हर्षाए ।
शिव, गौरां का, मन मुस्काए ॥
भक्त जन, करें जय जयकार, गौरा जी के, अंगना में...
काशी, से आई है बारात, गौरा जी के...

बम बम, भोले... महाँ देवा,
महाँ देवा, बम बम, भोले ॥
जय शंकर, कैलाश पति,
जय गौरां, जय पार्बती ॥

शंकर जी का कुण्डी सोटा ले गई गौरा पार्वती,
ले गई गौरा पार्वती हाँ ले गई गौरा पार्वती…..

पार्वती जी पूछन लागी जटा में तेरे क्या है पति,
जटा में मेरी गंगा विराजे खूब नहाओ पार्वती,
हाँ शंकर जी का कुण्डी सोटा ले गई गौरा पार्वती….

पार्वती जी पूछन लागी गले में तेरे क्या है पति,
गले में मेरे कंठी माला खूब जपो तुम पार्वती,
हाँ शंकर जी का कुण्डी सोटा ले गई गौरा पार्वती…..

पार्वती जी पूछन लागी हाथ में तेरे क्या है पति,
हाथ में मेरे डमरू विराजे खूब बजाओ पार्वती,
हाँ शंकर जी का कुण्डी सोटा ले गई गौरा पार्वती…..

पार्वती जी पुछन लागी गोद में तेरे क्या है पति,
गोद में मेरे गणपति लाला खूब खिलाओ पार्वती,
हाँ शंकर जी का कुण्डी सोटा ले गई गौरा पार्वती…..

पार्वती जी पूछन लागी संग में तेरे क्या है पति,
संग में मेरे नंदी विराजे खूब घूमो पार्वती,
हाँ शंकर जी का कुण्डी सोटा ले गई गौरा पार्वती….

मेरा सोता कुंवर जगाया है, ये मदारी कहां से आया है।

इनके सिर पे जटा विराजे,
मस्तक पे चंद्र सजाया है।
ये मदारी कहां से आया है।

इनके सिर पे गंगा बह रही,
और गले नाग लिपटाया है।
ये मदारी कहां से आया है।

इनके कान में बिच्छु लटक रहे,
और नेत्र तीसरा लगाया है।
ये मदारी कहां से आया है।

इनके एक हाथ में त्रिशूल सजा है,
दूजे में डमरू बजाया है।
ये मदारी कहां से आया है।

इनके तन मृगछाला लपेटी,
संग बूढ़ा नन्दिया लाया है।
ये मदारी कहां से आया है।

अज्ज डमरू वजा दे भोलिया,
अज्ज सभ नूं नचा दे भोलिया ll
हो 'नाम वाली मस्ती दे भंग दे पिआले' ll,
सभ नूं पिला दे भोलिया,,,
हो डमरू lll वजा दे भोलिया

डम डम डम डम डमरू वज्जिया l
सुण स्वरगां तों इंदर भज्जिया ll
हो 'दर भगतां दा मेला लग्गिया' ll,
दरश दिखा दे भोलिया
हो डमरू lll वजा दे भोलिया

नंदी बैल पा झांजर नच्चदा l
मां गौरां नूं बड़ा ही जच्चदा ll
हो 'मस्ती वाला रंग वरसदा' ll,
ओह वरसादे भोलिया
, हो डमरू lll वजा दे भोलिया

शंकर तेरा रूप सुहानी l
ब्रह्मा विष्णूं आदि भवानी ll
हो 'धरत पाताली ते असमानी' ll,
अज्ज रौणकां लवा दे भोलिया
हो डमरू lll वजा दे भोलिया

अमृत रस मैं पी जां सारी l
बणके तेरा प्रेम पुजारी ll
हो सभ भगतां नूं चढ़ी खुमारी,
नाम तेरे दी चढ़ी खुमारी,
नशा नाम दा चढ़ा दे भोलिया
हो डमरू lll वजा दे भोलिया

भोले दी बरात चली, गज वाज के,
सारीया ने भंग पीती राज राज के
हो सारीया ने ,सारीया ने,
सारीया ने भगत प्यारिया ने

ब्रह्मा विष्णु ख़ुशी मांदे,
देवी देव जय कारे लौंदे,
बन के बाराती आये सज धज के,
सारीया ने भंग पीती....

भोले वखरा रूप बनया,
गौर मैया नाल बयाह रचाया,
देखनु ने आये सारी भज भज के,
सारीया ने भंग पीती......

राजू वीर हरिपुरिये गाणी,
महिमा शिव दी कही ना शिवानी,
साज भी ना थके बज बज के,

सारीया ने भंग पीती.....

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
बम बम बम बम
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

डमरू को सुनकर जी कान्हा जी आए
बम बम बम बम
कान्हा जी आए संग राधा भी आए
वहाँ सखियों का मन भी मगन हो गया
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने.....

डमरू को सुनकर जी गणपत चले हैं
बम बम बम बम
गणपत चले संग कार्तिक चले
माँ अंबे का मन भी मगन हो गया
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने.....

डमरू को सुनकर जी रामा जी आए
बम बम बम बम
रामा जी आए संग लक्ष्मण जी आए
मैया सीता का मन भी मगन हो गया
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने.....

डमरू को सुनकर जी ब्रह्मा चले
बम बम बम बम
यहाँ ब्रह्मा चले वहाँ विष्णु चले
मैया लक्ष्मी का मन भी मगन हो गया
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने.....

डमरू को सुनकर जी गंगा चले
बम बम बम बम
गंगा चले वहाँ यमुना चले
माँ सरयू का मन भी मगन हो गया
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने.....

डमरू को सुनकर जी सूरज चले
बम बम बम बम
सूरज चले वहाँ चंदा चले
सारे तारों का मन भी मगन हो गया
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने.....


शिव पार्वती के संग पड़न लगी हरे हरे भावरिया
पहली भाग कैसे होंवे पंडित नहीं है साथ, शंकर जी जब कहने लगे रावण को लाओ रे बुलाया,
पड़न लागी हरे हरे पड़न लागी भाँवरिया,
शिव पार्वती के संग.....

दुजी भंवर कैसे होवे एक पुरुष दोनार,
शंकर जी जब कहने लगे गंगा को देओ रे उतार,
पड़न लागी हरे हरे पड़न लागी भाँवरिया,
शिव पार्वती के संग.....

तीजी भावर कैसे होवे मात-पिता नहीं पास,
शंकर जी यू कहने लगे ब्रह्मा को लाओ रे बुलाए,
पड़न लागी हरे हरे पड़न लागी भाँवरिया,
शिव पार्वती के संग.....

चौथी पावर कैसे होवे ‌दो हैं पुरुष एक नार,
शंकर जी यू कहने लगे चंदा को देवो रे उतार,
पड़न लागी हरे हरे पड़न लागी भाँवरिया,
शिव पार्वती के संग.....

पांचवी भंवर कैसे हो गए कोई बराती ना साथ,
शंकर जी यू कहने लगे भूतों को लाओ रे बुलाए,
पड़न लागी हरे हरे पड़न लागी भाँवरिया,
शिव पार्वती के संग.....

छठ विभाग और कैसे हो गए बाजा नहीं है साथ,
भोले जी तब कहने लागे डमरू दियो बजाय
पड़न लागी हरे हरे पड़न लागी भाँवरिया,
शिव पार्वती के संग.....

सातवीं भावर कैसे हो गए कोई सवारी ना साथ,
शंकर जी जब कहने लागे नंदी को लेओ रे बुलाय,
पड़न लागी हरे हरे पड़न लागी भाँवरिया
शिव पार्वती के संग.....

मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो
अनाड़ी मत समझो, अनाड़ी मत समझो,
मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो,
वो है त्रिपुरारी अनाड़ी मत समजो

मेरे भोले बाबा के गले में सर्प माला है,
अरे सर्पो को देख कर सपेरा मत समझो,
सपेरा मत समझो, सपेरा मत समझो,
मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो,

मेरे भोले बाबा के हाँथ में डमरू है,
डमरू को देख कर मदारी मत समझो,
मादारी मत समझो, मदारी मत समझो,
मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो,

मेरे भोले बाबा के तन मर्ग शाला,
म्र्गशाला को देख के शिकारी मत समजो,
मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो,

मेरे बाबा के संग में है नंदी,
नंदी को देख के व्यपारी मत संजो,
मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो,

घोटा घोटा मेरे शिवा ने लाया घोटा
शिवा ने लाया घोटा मेरे भोले ने लाया घोटा

जद शिवजी भांग तोड़न लागे
टोकर पे गया छोटा,मेरे शिवा ने घोटा
घोटा घोटा.......

जद शिवजी भांग बिजन लागे
बीज गिर गया मोटा,मेरे शिवा ने लाया घोटा
घोटा घोटा......

जद शिवजी भांग चानन लागे
कपडा पे गया छोटा,मेरे शिवा ने लाया घोटा
घोटा घोटा.....

जद शिवजी भांग पीवण लागे
पी गये सारा लोटा,मेरे शिवा ने लाया घोटा
घोटा घोटा......