Radha Krishan Bhajan

तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे, बलिहार प्यारे जू, बलिहार प्यारे जू -

तेरे बाल बड़े घुंगराले, बादल जो कारे कारे॥
तेरी मोर मुकट लटकनिया पे बलिहार प्यारे जू,
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे …..

तेरी चाल अजब मतवाली लगती है प्यारी प्यारी॥
तेरी पायल की झंकार पे बलिहार प्यारे जू, बलिहार प्यारे जू,
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे …..

तेरे संग में राधा प्यारी लगती है सबसे नियारी॥
इस युगल छवि पे मे जाऊ बलिहार प्यारे जू, बलिहार प्यारे जू,
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे …..

तेरे नयन बड़े मतवारे मटके है कारे कारे॥
तेरी तिरछी सी चितवनिया पे बलिहार प्यारे जू, बलिहार प्यारे जू,
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे …..

दिल तुमको दिया नन्दलाला,
दिल दे के बोहत पछताई,
तूने ये क्या किया नन्दलाला,
दिल तुमको दिया नन्दलाला॥

मैं तो बैठी थी यमुना किनारे,
तूने धक्का दिया नन्दलाला,
तूने ये क्या किया नन्दलाला,
दिल तुमको दिया नन्दलाला॥

तूने मीठी मुरलिया बजाई,
दिल तड़पा दिया नन्दलाला,
तूने ये क्या किया नन्दलाला,
दिल तुमको दिया नन्दलाला॥

मैं तो आई थी पानी भरन को,
कंकर मार दिया नन्दलाला,
तूने ये क्या किया नन्दलाला,
दिल तुमको दिया नन्दलाला॥

मुझे छोड़ गया तू मथुरा,
दिल हुआ रे उदास नन्दलाला,
तूने ये क्या किया नन्दलाला,
दिल तुमको दिया नन्दलाला॥

तूने रातो की नींद चुराई,
हाल बे हाल किया नन्दलाला,
तूने ये क्या किया नन्दलाला,
दिल तुमको दिया नन्दलाला॥

दिल दे के बोहत पछताई,
तूने ये क्या किया नन्दलाला,
दिल तुमको दिया नन्दलाला॥

राधे कौन से पुण्य किए तूने, हरी रोज तेरे घर आते हैं,
हरी रोज तेरे घर आते हैं, हरी रोज तेरे घर आते हैं,
राधे कौन से पुण्य किए तूने, हरी रोज तेरे घर आते हैं।।

राधे जब सोलह श्रृंगार करे,
हरी दर्पण रोज दिखाते हैं,
राधे कौन से पुण्य किए तूने, हरी रोज तेरे घर आते हैं........

राधे जब भोजन तैयार करे,
हरी माँग माँग कर खाते हैं,
राधे कौन से पुण्य किए तूने, हरी रोज तेरे घर आते हैं........

राधे जब जमुना जल भरण गई,
हरी गागर रोज उठाते हैं,
राधे कौन से पुण्य किए तूने, हरी रोज तेरे घर आते हैं........

सखी री मेरे मन अभिलाषा होय मदन मोहन के गुण गाउ।
मदन मोहन के गुण गाउ।मदन मोहन के गुण गाउ।
सखी री मेरे मन अभिलाषा होय मदन मोहन के गुण गाउ।

शीश पे मोर मुकुट सोहे ।
पगन पैजनिया मन मोहे।
कमर पितांबर झिलमिल होए, ना मुख से वर्णन कर पाऊं।-
सखी री मेरे मन अभिलाषा होय मदन मोहन के गुण गाउ।

कानन में कुंडल है आला।
गले में वैजयंती माला।
अधर मुरली प्यारी लागे मोहे, सुनु तो मन सुख पाऊं।
सखी री मेरे मन अभिलाषा होय मदन मोहन के गुण गाउ।-

या लट मुख पर काली काली।
चाल मोहन की मतवाली।
लटक लटकन प्यारी लागे मोहे, देखूं तू मन सुख पाऊं।
सखी री मेरे मन अभिलाषा होय मदन मोहन के गुण गाउ।-

सखी री बांके बिहारी से हमारी लड़ गयी अंखियाँ ।
बचायी थी बहुत लेकिन निगोड़ी लड़ गयी अखियाँ ॥

ना जाने क्या किया जादू यह तकती रह गयी अखियाँ
चमकती हाय बरछी सी कलेजे गड़ गयी आखियाँ ॥
सखी री बांके बिहारी से—

चहू दिश रस भरी चितवन मेरी आखों में लाते हो ।
कहो कैसे कहाँ जाऊं यह पीछे पद गयी अखियाँ ॥
सखी री बांके बिहारी से

भले तन से निकले प्राण मगर यह छवि ना निकलेगी
अँधेरे मन के मंदिर में मणि सी गड़ गयी अखियाँ ॥
सखी री बांके बिहारी से—--

कृष्णा तेरी मुरली ते भला कौन नही नाचदा,
धरती चन सितारे नाच्दे सारे भगत प्यारे नाच्दे,
राधा नचदी मीरा नचदी सारा आलम तकदा,
कृष्णा तेरी मुरली ते .....................

धुर दरगहो आई मुरली जद होठा ना लाइ मुरली,
गीत प्रभु दे गई मुरली होका दे गी सच दा,
कृष्णा तेरी मुरली ते .....................

मन मोहन घनश्याम तू है इस्वर अल्लाह राम भी तू है,
उस मालिक दा नाम भी तू है जो सबना विच वसदा,
कृष्ण तेरी मुरली ते..........

लाल औथोली वाला कहंदा कृष्ण जो तेरा नाम लेनदा,
दुनिया दा हर सुख पा लेनदा काखो बन जे लाख दा,
कृष्णा तेरी मुरली ते .....................

राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता पत्ता श्याम बोलदा ।
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता पत्ता श्याम बोलता ॥

कली कली मैं महक उसी की,
हर पक्षी मैं चहक उसी की ।
नाचे मोरे कोकें, कोयलिया कारी, के पत्ता पत्ता श्याम बोलदा ॥

राधा नाम का खिल गया उपवन,
महक उठा सारा वृन्दावन ।
गूंजे गली गली में शोर भारी, के पत्ता पत्ता श्याम बोलता ॥

प्रेम के जल से सिंची ये बगिया,
महके ग्वाले महकीं सखिया
सब रसिकन को लागी हैं प्यारी, के पत्ता पत्ता श्याम बोलदा ॥

चारों ओर छाई हरियाली,
फिरत राधा संग बनवारी
ऐसी पागल की बगिया है न्यारी, के पत्ता पत्ता श्याम बोलदा ॥

ओ गिरिधर, ओ काहना, ओ ग्वाला, नंदलाला,
मेरे मोहन, मेरे काहना, तू आ ना, तरसा ना ।

काली कमली वाला मेरा यार है,
मेरे मन का मोहन तू दिलदार है ।
तू मेरा यार है, मेरा दिलदार है ॥

मन मोहन मैं तेरा दीवाना, गाउँ बस अब यही तराना ।
श्याम सलोने तू मेरा रिजवार है, मेरे मन का मोहन तू दिलदार है ॥

तू मेरा मैं तेरा प्यारे, यह जीवन अब तेरे सहारे ।
तेरे हाथ इस जीवन की पतवार है, मेरे मन का मोहन तू दिलदार है ॥

पागल प्रीत की एक ही आशा, दर्दे दिल दर्शन का प्यासा ।
तेरे हर वादे पे मुझे ऐतबार है, मेरे मन का मोहन तू दिलदार है ॥

तुझको अपना मान लिया है, यह जीवन तेरे नाम किया है ।
हम सब को बस तुमसे ही प्यार है, मेरे मन का मोहन तू दिलदार है ॥

कृष्ण कहने से, तर जाएगा , पार भव से, उत्तर जाएगा l
बड़ी मुश्किल से, नर तन मिला lll
क्या पता फिर , किधर जाएगा ll
पार भव से, उत्तर जाएगा कृष्ण कहने से, तर,,,,,,,,,,,,,

होगी घर घर में, चर्चा तेरी llll
जिस गली से ll, गुज़र जाएगा ll
पार भव से, उत्तर जाएगा कृष्ण कहने से, तर,,,,,,,,,,,,,

सब कहेंगे, कहानी तेरी llll
काम ऐसा तूँ ll, कर जाएगा ll
पार भव से, उत्तर जाएगा कृष्ण कहने से, तर,,,,,,,,,,,,,

उसके आगे तूँ, झोली फैला llll
दाता झोली को ll, भर जाएगा ll
पार भव से, उत्तर जाएगा कृष्ण कहने से,

कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला। -
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥-

राधाने श्याम कहा, मीरा ने गिरधर।
कृष्णा ने कृष्ण कहा, कुब्जा ने नटवर॥
ग्वालो ने तुझको पुकारा गोपाला।
मैं तौ कहुँ साँवरिया बाँसुरिया वाला॥

घनश्याम कहते हैं बलराम भैया।
यशोदा पुकारे कृष्ण कन्हैया॥
सुरा की आँखों कें तुम हो उजाला।
मैं तो कहुँ साँवरिया बाँसुरिया वाला॥

भीष्म ने बनवारी, अर्जुन ने मोहन।
छलिया भी कह कर के बोला दुर्योधन॥
कन्स तो जलकर के कहता है काला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥

भक्तों के भगवान, संतो के केशव।
भोले कन्हैया तुम मेरे माधव॥
ग्वालिनिया तुझको पुकारे नंदलाला।
मैं तौ कहुँ साँवरिया बाँसुरिया वाला॥

कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥

बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया, सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया।
1 मीरा पुकारी जब गिरिधर गोपाला, ढल गया अमृत में विष का भरा प्याला।
कौन मिटाए उसे, जिसे तू राखे पिया, सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया॥

2 जब तेरी गोकुल पे आया दुख भारी, एक इशारे से सब विपदा टारी।
मुड़ गया गोवर्धन तुने जहाँ मोड़ दिया, सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया॥

3 नैनो में श्याम बसे, मन में बनवारी, सुध बिसराएगी मुरली की धुन प्यारी।
मन के मधुबन में रास रचाए रसिया, सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया॥

दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी ,
दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी
कैसे आऊं मैं कन्हैया, तेरी गोकुल नगरी
कैसे आऊं मैं कन्हाई, तेरी गोकुल नगरी बड़ी दूर नगरी

रात में आऊं तो कान्हा, डर मोहे लागे
दिन में आऊं तो, देखे सारी नगरी बड़ी दूर नगरी

सखी संग आऊं कान्हा, शर्म मोहे लागे
अकेली आऊं तो भूल जाऊ डगरी बड़ी दूर नगरी

धीरे धीरे चालूँ कान्हा, कमर मोरी लचके
झटपट चालूँ तो छलकाए गगरी बड़ी दूर नगरी

कान्हा दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी
कैसे आऊं मैं कन्हाई, तेरी गोकुल नगरी बड़ी दूर नगरी

ज़रा इतना बता दे कान्हा, तेरा रंग काला क्यों,
तू काला होकर भी जग से निराला क्यों॥

मैंने काली रात को जन्म लिया
और काली गाय का दूध पीया,
मेरी कमली भी काली है , इस लिए काला हूँ
ज़रा इतना बता दे….

सखी रोज़ ही घर में बुलाती है
और माखन बहुत खिलाती है,
सखिओं का भी दिल काला, इस लिए काला हूँ
ज़रा इतना बता दे….

मैंने काली नाग पर नाच किया
और काली नाग को नाथ लिया,
नागों का रंग काला, इस लिए काला हूँ
ज़रा इतना बता दे….

सावन में बिजली कड़कती है
बादल भी बहुत बरसतें है
बादल का रंग काला, इसलिए काला हूँ
ज़रा इतना बता दे….

सखी नयनों में कजरा लगाती है
और नयनों में मुझे बिठाती है -
कजरे का रंग काला, इसलिए काला हूँ -
ज़रा इतना बता दे कान्हा....

मुझे राधे राधे कहना सिखादे , कन्हिया तेरा क्या बिगडे

वृंदावन जाऊ तेरे गुण गाऊ
चरनो की धुली को माथे से लगाऊ
मेरी वृन्दावन कोठी बना दे , कन्हिया तेरा क्या बिगडे........

यमुना तट जाऊ वहा नही पाऊ
बंसीवट जाऊ वहा नही पाऊ
अपने मिलने का ठिकाना बता दे, कन्हिया तेरा क्या बिगडे........

अपनी शरण में ले ले मोहन
अपने ही रंग में रंग ले मोहन
अपनी गाऊओ का ग्वाला बना ले , कन्हिया तेरा क्या बिगडे........

मन मन्दिर में ज्योत जगाऊ
आठो पहर तेरे नाम को सिमरु
अपने नाम का दीवाना बना दे , कन्हिया तेरा क्या बिगडे........

तेरे संग संग रहूंगी ओ मोहना,
मेरे ओ मोहना मेरे ओ सोहना,
तेरे संग संग रहूंगी ओ मोहना...

तुम चंदन बनो मैं पानी बनू,
तिलक में मिलूंगी ओ मोहना,
तेरे संग संग रहूंगी ओ मोहना...

तुम दीपक बनो मे बाती बनो,
ज्योति में मिलेंगे ओ मोहना,
तेरे संग संग रहूंगी ओ मोहना...

तुम चंदा बनो हम तारे बने,
रातों में मिलेंगे ओ मोहना,
तेरे संग संग रहूंगी ओ मोहना...

तुम मुरली बनो उसकी सुर मैं बनू,
अधरों पर मिलेंगे ओ मोहना,
तेरे संग संग रहूंगी ओ मोहना...

तुम मोती बनो हम धागा बने,
माला में मिलेंगे ओ मोहना,
तेरे संग संग रहूंगी ओ मोहना...

तुम वक्ता बनो मैं श्रोता बनूं,
सत्संग में मिलेंगे ओ मोहना,
तेरे संग संग रहूंगी ओ मोहना...

तेरी बंसी पे जाऊं बलिहार रसिया, मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया।

ओड़ के आई मैं तो लाल चुनारिया
मटकी उठा के मैं तो बन गयी गुजरिया।
मैं तो कर आई सोला श्रृंगार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया॥

तेरे पीछे मैं तो आई अकेली
बड़े गोप की नयी नवेली।
आई हूँ करने मनोहार रसिया ,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया॥

जब से लगी है तेरी लगनवा
बिसर गयो मोहे घर आंगनवा।
मैं तो छोड़ आई सारा संसार रसिया,
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया॥

राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी, राधे राधे रटो चले आएँगे बिहारी,
आएँगे बिहारी चले आएँगे बिहारी, राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधा मेरी चंदा, चकोर है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधा रानी मिश्री, तो स्वाद है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधा रानी गंगा, तो धार है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधा रानी तन है तो, प्राण है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधा रानी सागर, तरंग है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधा रानी मोहनी, तो मोहन है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधा मेरी गोरी तो, साँवरे बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधा रानी भोली भाली , चंचल बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधा रानी नथनी, तो कंगन बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधा रानी मुरली, तो तान है बिहारी,
राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी, राधे राधे रटो चले आएँगे बिहारी,
आएँगे बिहारी चले आएँगे बिहारी, राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी ॥

बांके बिहारी की देख छटा, मेरो मन है गयो लटा पटा।

कब से खोजूं बनवारी को, बनवारी को, गिरिधारी को।
कोई बता दे उसका पता, मेरो मन है गयो लटा पटा॥

मोर मुकुट श्यामल तन धारी, कर मुरली अधरन सजी प्यारी।
कमर में बांदे पीला पटा, मेरो मन है गयो लटा पटा॥

पनिया भरन यमुना तट आई, बीच में मिल गए कृष्ण कन्हाई।
फोर दियो पानी को घटा, मेरो मन है गयो लटा पटा॥

टेडी नज़रें लत घुंघराली, मार रही मेरे दिल पे कटारी।
और श्याम वरन जैसे कारी घटा, मेरो मन है गयो लटा पटा॥

मिलते हैं उसे बांके बिहारी, बांके बिहारी, सनेह बिहारी।
राधे राधे जिस ने रटा, मेरो मन है गयो लटा पटा॥

श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए।
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥

राधे तेरी कृपा तो दिन रात बरसती है।
एक बूँद जो मिल जाए, मन की कलि खिल जाए॥
श्यामा तेरे चरणों …….. सच कहता हूँ………

यह मन बड़ा चंचल है, कैसे तेरा भजन करूँ।
जितना इसे समझाऊं, उतना ही मचल जाए॥
श्यामा तेरे चरणों …….. सच कहता हूँ………

नजरो से गिराना ना, चाहे जो भी सजा देना।
नजरो से जो घिर जाए, मुश्किल ही संभल पाए॥
श्यामा तेरे चरणों …….. सच कहता हूँ………

राधे इस जीवन की बस एक तम्मना है।
तुम सामने हो मेरे, मेरा दम ही निकल जाए॥
श्यामा तेरे चरणों …….. सच कहता हूँ………

मेरे भी घर श्यामा आई वे
मेरे भी घर श्यामा आई वे,
मैं तां खोल रखां बारियां ॥
खोल रखां बारियां मैं खोल रखां बारियां ॥
इक्क वारी दर्श दिखाईं वे,
मैं तां खोल रखां बारियां ।
मेरे भी घर श्यामा आई वे ...

जहर प्याला मीरा ने पीत्ता ।
ज्हरां दे विच्चों ओहने दर्शन कीत्ता ॥
मैनूं भी दर्श दिखाईं वे,
मैं तां खोल रखां बारियां ।
मेरे भी घर श्यामा आई ...

यमुना दे कंडे कंडे ग‌ऊयां चरावे ।
सखियां दे नाल श्यामा रासां पावे ॥
मैनों भी चरणीं लाई वे,
मैं तां खोल रखां बारियां ।
मेरे भी घर श्यामा आई ...

विच्च सभा दे द्रोपदां पुकारे ।
आ जाओ मेरे मोहन प्यारे ॥
मेरी भी लाज बचाई वे,
मैं तां खोल रखां बारियां ।
मेरे भी घर श्यामा आई ...

अकेली गई थी ब्रिज में कोई नही था मेरे मन में
मोर पंख वाला मिल गया

नींद चुराई बंसी बजा के , चैन चुराया सैन चुरा के
लगी आस मेरे मन में, गई थी मैं वृंदावन में,
बांसुरी वाला मिल गया
मोर पंख वाला मिल गया

उसी ने बुलाया, उसी ने रुलाया,
ऐसा सलोना श्याम मेरे मन भाया
तेरी बांकी चाल देखी, तेरा मुकट भी देखा
टेढ़ी टांग वाला मिल गया
मोर पंख वाला मिल गया

बांके बिहारी मेरे हिरदये में बसाऊ
तेरे बिन श्याम सुंदर कहा चैन पाऊ
लगन लगी तन मन में , ढूंड रही मैं निधि वन में
गाऊये वाला मिल गया
मोर पंख वाला मिल गया

गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है,
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है,
गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है॥

तेरी चौखट पर आना मेरा काम है,
मेरी बिगड़ी बनाना तेरा काम है,
गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है,
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है॥

तेरी राहों पे अब तो कदम पड़ गए,
आगे राह दिखाना तेरा काम है,
गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है,
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है॥

मैंने मन को तो मंदिर बना ही लिया,
उसमें आसन लगाना तेरा काम है,
गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है,
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है॥

मैंने दीपक में बाती लगाई दी,
आके बाती जगाना तेरा काम है,
गोविंद मेरो है गोपाल मेरो है,
श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है॥

1. गोविंद मेरो है, गोपाल मेरो है। श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो है
2. श्याम मेरो है, घनश्याम मेरो है श्री श्याम बिहारी राधे श्याम मेरो है
3. कृष्ण मेरो है, गिरधारी मेरो है। श्री कृष्ण मुरारी बनवारी मेरो है
4. मोहन मेरो है मनमोहन मेरो है। श्री कुंज बिहारी मदनमोहन मेरो है
5. केशव मेरो है, माधव मेरो है। यो यशोदा को लालो नंदलालो मेरो है
6. कन्हाइयो मेरो है, नगरियो मेरो है। श्री रास रचाइयो सांवरीयो मेरो है
7. नटवर मेरो है, वंशीधर मेरो है। श्री नवल किशोर मुरलीधर मेरो है
8. दिनानाथ मेरो है, गोपी नाथ मेरो है। श्री जुगल किशोर द्वारका नाथ मेरो है
9. माखन चोर मेरो है, मटकी फोड़ मेरो है श्री नाग नथैयो रणछोड़ मेरो है।।

बांके बिहारी कजरारे मोटे-मोटे तेरे नैन,
नजर ना लग जाये,"ओये होये होये" नजर ना लग जाये,"ओये होये होये"

1 काजल के कोरे, "ओये होये होये",
मेरा जिगर मरोड़े, "ओये होये होये",
रंग रस में भोरे, "ओये होये होये",
मैं तो हारी रे, कजरारे मोटे मोटे तेरे नैन,
नजर ना लग जाये,"ओये होये होये"

2 आँखों का काजल, "ओये होये होये" ,
मेरा जिगर है घायल, "ओये होये होये",
तेरे प्यार मैं पागल, "ओये होये होये",
कर डारि रे कजरारे मोटे मोटे तेरे नैन,
नजर ना लग जाये,"ओये होये होये"

3 तेरे मुकुट की लटकन, "ओये होये होये" ,
तेरे अधर की मुस्कान, "ओये होये होये",
गिरवह की मटकन, "ओये होये होये",
बलिहारी रे कजरारे मोटे मोटे तेरे नैन,
नजर ना लग जाये,"ओये होये होये"

4 तेरी रीत है टेढ़ी, "ओये होये होये",
तेरी प्रीत है टेढ़ी,"ओये होये होये",
तेरी जीत है टेढ़ी, "ओये होये होये"
में तो हारी रे कजरारे मोटे मोटे नैन,
नजर ना लग जाये,"ओये होये होये"

नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा,
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन गोविंदा

तूं ही नटवर तूं ही नागर, तूं ही बाल मुकन्दा ,
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा...

सब देवन में कृष्ण बड़े हैं, ज्यों तारा विच चंदा ,
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा...

सब सखियन में राधाजी बड़ी हैं, ज्यों नदियां वींच गंगा,
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा...

ध्रुव तारे प्रह्लाद उबारे, नरसिंह रूप धरंता ,
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा...

कालीदह में नाग ज्यों नाथों,फण-फण निरत करंता,
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा...

वृन्दावन में रास रचायो, नाचत बाल मुकन्दा,
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा…

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, काटो जम का फंदा ,
भजो रे मन गोविंदा, नटवर नागर नंदा...

राधा रानी के रसीले नैना मोहन से लड़े,
मोहन से लड़े मुरली वाले से लड़े....
राधा रानी के रसीले नैना मोहन से लड़े,

भोली भाली छवि राधा की, कन्हा के मन भाई,
भोली सूरत, मोहनी मूरत, हृदय में समाई,
हारावाले के दीवाने भगत सेवा में खड़े,
राधा रानी के रसीले नैना मोहन से लड़े...

प्यारी प्यारी मुरली बाजे मेरे सावरे की,
राधा रानी की प्यालियाँ में घुँघरू हैं जड़े,
राधा रानी के रसीले नैना मोहन से लड़े....

मेरे सावरे के माथे पे मुकुट विराजे,
राधा रानी की नथनियाँ में हीरे हैं जड़े,
राधा रानी के रसीले नैना मोहन से लड़े.....

मेरे सावरे के गल फुल्लो की माला,
राधा रानी हरवे में हीरे मोती हैं जड़े,
राधा रानी के रसीले नैना मोहन से लड़े...

मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने खारो खारो जमुनाजी को पानी लागे |

यमुना मैया काली काली राधा गोरी गोरी |
वृन्दावन में धूम मचावे बरसाना की छोरी |
व्रज्धाम राधाजू की रजधानी लागे ||
मने खारो खारो जमुनाजी को पानी लागे |
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे, मने खारो खारो जमुनाजी को पानी लागे |

कान्हा नित मुरली मे टेरे सुमरे बारम बार |
कोटिन रूप धरे मनमोहन, कोई ना पावे पार
रूप रंग की छबीली पटरानी लागे ||
मने खारो खारो जमुनाजी को पानी लागे |
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे, मने खारो खारो जमुनाजी को पानी लागे |

ना भावे मने माखन-मिसरी, अब ना कोई मिठाई |
मारी जीबड़या को भावे अब तो राधा नाम मलाई |
वृषभानु की लाली तो गुड़धानी लागे ||
मने खारो खारो जमुनाजी को पानी लागे ।
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे, मने खारो खारो जमुनाजी को पानी लागे |

राधा राधा नाम रटत है जो नर आठों याम |
तिनकी बाधा दूर करत है राधा राधा नाम |
राधा नाम मे सफल जिंदगानी लागे ||
मने खारो खारो जमुनाजी को पानी लागे ।
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे, मने खारो खारो जमुनाजी को पानी लागे ।

मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है l
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है ll

पटवार के बिना ही, मेरी नाव चल रही है l
हैरान है ज़माना, मंज़िल भी मिल रही है ll
करता नहीं मैं कुछ भी, सब काम हो रहा है l
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है ll

तुम साथ हो जो मेरे, किस चीज़ की कमी है l
किसी और चीज़ की अब, दरकार ही नहीं है ll
तेरे साथ से गुलाम अब, गुलफाम हो रहा है l
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है ll

मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा पार कैसे पाऊं l
टूटी हुई वाणी से, गुणगान कैसे गाऊं ll
तेरी मेहरबानी का ये, पैगाम हो रहा है l
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है ll

मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है l
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है ll

अकेली मत जाना ओ राधे रानी

मेरे कन्हिया के घूंघर वाले बाल,
उलझ मत जाना ओ राधे रानी, अकेली........

मेरे कन्हिया के मोटे मोटे नैन है,
डूब मत जाना ओ राधे रानी, अकेली........

मेरे कन्हिया की मीठी मीठी बतीया,
बहक मत जाना ओ राधे रानी , अकेली........

मेरे कन्हिया की भोली सुरतिया,
खो मत जाना ओ राधे रानी, अकेली........

यमुना किनारे की उचि नीची सीढ़िया,
फिसल मत जाना ओ राधे रानी , अकेली........

माये नी माये श्याम लगदा बड़ा प्यारा,
ओह काला काला कुंडलवाला,
कालिया कमलिया वाला,

क्या करने तेरे बिंदिया टिके,
चन्दन टिका लाके कर लेना गुजारा,
माये नी माये श्याम लगदा बड़ा प्यारा,

क्या करने तेरे गहने जेवर,
तुलसी माला पाके कर लेना गुजारा,
माये नी माये श्याम लगदा बड़ा प्यारा,

क्या करने तेरे रेशमी वस्त्र,
पगवा चोला पाके कर लेना गुजारा,
माये नी माये श्याम लगदा बड़ा प्यारा,

क्या करने तेरे महल चबारे,
वन विच कुटिया पाके कर लेना गुजारा,
माये नी माये श्याम लगदा बड़ा प्यारा,

क्या करने तेरे लडू पड़े,
माखन मिश्री खाके कर लेना गुजारा,
माये नी माये श्याम लगदा बड़ा प्यारा,

माये नी माये श्याम लगदा बड़ा प्यारा,
ओह काला काला कुंडलवाला,
कालिया कमलिया वाला,

बिन पानी के नाव चला दे, ऐसा एक खिवैया हैं।
वृंदावन में रहता है वो, उसका नाम कन्हैया है ।।

ना ही कोई सन्त है वो, ना ही कोई साधू है।
छोटा सा एक बालक है पर, उसके हाथ में जादू है।
छोटी सी अंगुली पर देखो, गिरवर का धरैया है ।।
वृंदावन में रहता है वो...

ऐसे-ऐसे काम किये भई, रख दिया हिलाकर के।
कैसे-कैसे किये करिश्में, बांसुरी बजाकर के।
छः गज की साड़ी ना उतरी, ऐसा चीर बड़इया है
वृंदावन में रहता है वो...

मुझसे पूछा कई भक्तों ने, दिखने में वो कैसा है।
मैंने कहा दिल देकर देखो, दीवानों के जैसा है।
दिल वालों पर जान लुटाये, ऐसा दिल का लगैया है।।
वृंदावन में रहता हैं वो...

उसकी भोली सूरत ऐसी, सारा जमाना भूल गये।
चले गये 'बनवारी' लेकिन वापस आना भूल गये।
बंशी बजाकर अपणा बणाये, ऐसा बंशी बजैया है।।
वृंदावन में रहता है वो...

राधा रानी से मिलना बड़ा जरुरी
मिलना बड़ा जरुरी मुझे मिलना बड़ा जरुरी
राधा रानी से मिलना बड़ा जरुरी

जो मैं होती पवन बंसती चोखा बन कर आते,
जो मैं होती बेला चमली चरणों में बिछ जाती
ना बन पाई हवा का झोंका ये मेरी मज़बूरी
राधा रानी से मिलना बड़ा जरुरी

जो मैं होती काली बदरियाँ छम छम नीर बहाती
गरज गरज कर और बरस बरस कर तुम को नित नेहलाती
ना बन पाई कारी बदरिया ये मेरी मज़बूरी
राधा रानी से मिलना बड़ा जरुरी

जो मैं तेरा पता जानती खत लिखती बिज्वाती,
सब रसिकन को संग में लेकर तुम से मिलने आती,
पता तेरा मेरे पास नही है ये मेरी मजबुरी,
राधा रानी से मिलना बड़ा जरुरी

जो तुम होती पास हमारे झूम झूम कर गाती,
हाथ पकड़ इत्लाती श्यामा मन के भाव सुनाती
मेरी तो मज़बूरी राधे तेरी क्या मज़बूरी
राधा रानी से मिलना बड़ा जरुरी