Siyaram Bhajan

जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम |
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम श्याम ||

माखन ब्रज में एक चुरावे, एक बेर के खावे |
प्रेम भाव से भरे अनोखे, दोनों के है काम ||

एक कंस पापी को मारे, एक दुष्ट रावण संहारे |
दोनों दीन के दुःख हरत है, दोनों बल के धाम ||

एक ह्रदय में प्रेम बढावे, एक ताप संताप मिटावे |
दोनों सुख के सागर है, और दोनों पूरण काम ||

एक राधिका के संग राजे, एक जानकी संग बिराजे |
चाहे सीता-राम कहो, या बोलो राधे-श्याम ||

जल जाए जिहवा पापिनी, राम के बिना ll
राम के बिना रे, राम के बिना,
जल जाए जिहवा पापिनी, राम के बिना ll

क्षत्रिय आन बिना ll, विप्र ज्ञान बिना, घर संतान बिना,
देह प्रान बिना, हाथ दान बिना, भोजन मान बिना ll
हम सब का बेकार है जीना ll, रघुवर नाम बिना,,,
जल जाए जिहवा पापिनी, राम के बिना ll

पंछी पंख बिना ll, बिच्छू डंक बिना, आरति शंख बिना,
गणित अंक बिना, कमल पंक बिना, निशा मयंक बिना ll
ब्यर्थ भ्रमण चिंतन भाषण सब ll, हरि के नाम बिना,,,
जल जाए जिहवा पापिनी, राम के बिना ll

प्रिया कंत बिना ll, हस्ती दंत बिना, आदि अंत बिना,
वेद मंत्र बिना, मठ महंत बिना, कुटिया संत बिना ll
भजन बिना नर ऐसे जैसे ll, अश्व लगाम बिना,,,
जल जाए जिहवा पापिनी, राम के बिना ll

पुष्प बाग बिना ll, संत त्याग बिना, गाना राग बिना,
शीश नमन बिना, नयन दरस बिना, नारी सुहाग बिना ll
संत कहे ये जग है सूना ll, आत्म ज्ञान बिना,,,
जल जाए जिहवा पापिनी, राम के बिना ll

नगरी हो अयोध्या सी,
रघुकुल सा घराना हो ।
और चरण हो राघव के,
जहाँ मेरा ठिकाना हो ॥

हो त्याग भारत जैसा,
सीता सी नारी हो ।
और लवकुश के जैसी
संतान हमारी हो ॥

नगरी हो अयोध्या सी,
रघुकुल सा घराना हो ।
और चरण हो राघव के,
जहाँ मेरा ठिकाना हो ॥

श्रद्धा हो श्रवण जैसी,
शबरी सी भक्ति हो ।
और हनुमत के जैसी
निष्ठा और शक्ति हो ॥

नगरी हो अयोध्या सी,
रघुकुल सा घराना हो ।
और चरण हो राघव के,
जहाँ मेरा ठिकाना हो ॥

मेरी जीवन नैया हो,
प्रभु राम खेवैया हो ।
और राम कृपा की सदा
मेरे सर छय्या हो ॥

नगरी हो अयोध्या सी,
रघुकुल सा घराना हो ।
और चरण हो राघव के,
जहाँ मेरा ठिकाना हो ॥

सरयू का किनारा हो,
निर्मल जल धारा हो ।
और दरश मुझे भगवन
हर घडी तुम्हारा हो ॥

नगरी हो अयोध्या सी,
रघुकुल सा घराना हो ।

कौशल्या सी माई हो,
लक्ष्मण सा भाई ।
और स्वामी तुम्हारे जैसा,
मेरा रघुराई हो ॥

नगरी हो अयोध्या सी,
रघुकुल सा घराना हो ।

श्रद्धा हो श्रवण जैसी,
शबरी सी भक्ति हो ।
हनुमान के जैसे निष्ठा,
और शक्ती हो ॥

और चरण हो राघव के,
जहाँ मेरा ठिकाना हो ॥

मेरी नैया में लक्ष्मण राम गंगा मैया धीरे बहो,
धीरे बहो गंगा धीरे बहो,
लहरों में उठे हिलोर गंगा मैया धीरे बहो,
मेरी नैया में लक्ष्मण राम गंगा मैया धीरे बहो...

कौन की है गंगा कौन की है नैया,
कौन के है लक्ष्मण राम गंगा मैया धीरे बहो,
मेरी नैया में लक्ष्मण राम...

भागीरथ की गंगा केवट की है नैया,
दशरथ के लक्ष्मण राम गंगा मैया धीरे बहो,
धीरे बहो गंगा धीरे बहो,
मेरी नैया में लक्ष्मण राम...

काहे आई गंगा काहे आई नैया,
काहे आये लक्ष्मण राम गंगा मैया धीरे बहो,
धीरे बहो गंगा धीरे बहो,
मेरी नैया में लक्ष्मण राम...

पाप हरे गंगा पार करे नैया,
भक्तन हित लक्ष्मण राम गंगा मैया धीरे बहो,
मेरी नैया में लक्ष्मण राम गंगा मैया धीरे बहो...

मेरी नैया में लक्ष्मण राम गंगा मैया धीरे बहो,
धीरे बहो गंगा धीरे बहो,
मेरी नैया में लक्ष्मण राम गंगा मैया धीरे बहो...